1. बकरियों को बाहर घास चरनें नहीं भेजा जाता।
  2. इस विधि में बकरियों में चराने की आवष्यकता नहीं होती, जिससे उनका उर्जा व्यय कम होता है तथा वजन में वृद्धि तेजी से होती है।
  3. इस विधि में बकरियाॅ जंगली जानवरों तथा चोरों से पूर्णतयाः सुरक्षित रहती हैं।
  4. बकरियों को शेड में ही (जमीन पर या जमीन से उठा हुआ) ब्रीड, लिंग, उम्र तथा वजन के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।
  5. बीजू बकरे और बकरियों को अलग-अलग बाड़ों रखा जाता है तथा उनको मेटिंग के समय ही बकरियों से मिलाया जाता है।
  6. चारे की मात्रा एवं गुणवत्ता को विभिन्न उम्र की बकरियों के अनुसार नियंत्रित किया जाता है।
  7. बकरियों को चराने के दौरान होने वाली हानि शून्य के बराबर होती हैं।
  8. चराने के दौरान बाहर से आने वाली बिमारियों से शत-प्रतिशत सुरक्षा होती है।
  9. Goat farming training in UP से संबंधित रिकार्ड को एकत्र करना सुविधाजनक रहता है।
  10. खाद का बेहतर और उचित उपयोग। खाद को आसानी से इकठ्ठा करके खेत में या बाजार में आसानी से बेचा जा सकता है।
Bakri Palan ki Jankari